माइक्रो व्यंग्य -
" देशभक्ति -जनसेवा"
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देशभक्ति और जनसेवा के भावों से ओतप्रोत एक सिपाही मंत्री जी का गिरफ्तारी वारंट लेकर दौड़ रहा है। मंत्री जी की कार आगे आगे और सिपाही की टूटरी साइकिल पीछे पीछे......
दौड़ चल रही है .......
सिपाही थक गया है ।
बेहोश होकर गिर गया है ,इसलिए उसे नौकरी से निलंबित किए जाने का फरमान जारी होता है क्योंकि उसने देशभक्ति और जनसेवा के चालू सिद्धांतो का पालन नहीं किया।
सिपाही के बेहोश हो जाने पर मंत्री के नाम जारी गिरफ्तारी वारंट की जप्ती बड़े साहब करते हैं और जप्त किया वारंट सबसे बड़े साहब के बिस्तर में सो रहे मंत्री को सुपुर्द कर देते हैं।
चार पांच दिन से मंत्री जी सबसे बड़े साहब के बेडरूम में आराम करने आ जाते हैं । किसी को पता नहीं चलता और वे सबसे बड़े साहब के बंगले में घुस जाते हैं। मजे की बात है कि मंत्री जी का गिरफ्तारी वारंट साहब के आदेश पर हुआ था।
एक बोतल खतम होने के बाद, मंत्री जी के आदेश पर संतरी बोतल लेने गया ....
जल्दबाजी में सड़क पार करते समय मंत्री जी का डंफर उसके ऊपर चढ़ गया।
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जयप्रकाशपाण्डेय