इस कविता में सूरज इसलिए ,
ताकि ' सुबह ' का एहसास रहे ,
इस कविता में ख्वाब इसलिए ,
ताकि उम्मीद का सिलसिला बने ,
इस कविता में 'याद' इसलिए ,
ताकि जीवन में रोमांच मिले ,
इस कविता में ' आग ' इसलिए ,
ताकि सबको परम सुख मिले ,
इस कविता में 'आवाज ' इसलिए ,
ताकि जागते रहो की मुनादी मिले ,
इस कविता में संतोष इसलिए ,
ताकि सबको भरपूर सुख मिले ,
इस कविता में सिटिजन इसलिए ,
ताकि सच्चे अच्छे को अधिकार मिले ,
इस कविता में ''ओबामा ''इसलिए ,
ताकि 'परिवर्तन ' की याद रहे ,
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--जय प्रकाश पाण्डेय
माइक्रो फाइनेंस शाखा
भोपाल
Sunday, March 28, 2010
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