Friday, September 3, 2010

वित्तीय साक्षरता एवं परामर्श केन्द्रों (FLCC) के लिए



उद्देश्य

FLCCs का व्यापक उद्देश्य होगा नि:शुल्क वित्तीय साक्षरता/शिक्षा तथा साख परामर्श उपलब्ध कराना।FLCCs के विशिष्ट उद्देश्य निम्नलिखित होंगे:
(i). ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में, औपचारिक वित्तीय प्रक्षेत्र से उपलब्ध होने वाले विभिन्न वित्तीय उत्पादों एवं सेवाओं के संदर्भ में लोगों को शिक्षित करना;
(ii). औपचारिक वित्तीय क्षेत्रक से जुड़ने के फायदों के बारे में लोगों को जागरूक करना;
(iii). लोगों को, शिक्षा एवं जवाबदेहीपूर्ण तरीके से ऋण लेने सहित आमने-सामने की प्रत्यक्ष वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराना तथा औपचारिक अथवा अनौपचारिक वित्तीय क्षेत्रक से ऋण लेकर कर्ज में डूबे लोगों को साख परामर्श उपलब्ध कराना
(iv). आपदाग्रस्त कर्जदाता के लिए ऋण की रीस्ट्रक्चरिंग योजनाएं बनाना तथा इस पर विचार हेतु इसकी अनुशंसा को-ऑपरेटिवों सहित अन्य औपचारिक वित्तीय संस्थाओं से करना ;
(v). ऐसा कोई भी कार्य करना जो बैंकिंग उत्पादों, वित्तीय नियोजन तथा व्यक्ति के ऋण संबंधी कष्टों में सुधार लाने के लिए लोगों में वित्तीय साक्षरता और जागरूकता लाएं; तथा
(vi). अन्य कोई ऐसा कार्य करना जो उपरोक्त तथ्यों के लिए सहायक हो।
यद्यपि, FLCCs को निवेश सलाह केन्द्रों के रूप में कार्य नहीं करना चाहिए।
ऋण परामर्श/साख परामर्श दोनों ही निरोधक एवं उपचारात्मक हो सकते हैं। निरोधक परामर्श की स्थिति में, केन्द्र द्वारा साख का मूल्य, वारंटेड होने की स्थिति में बैकवर्ड एवं फॉरवर्ड लिंकेज इत्यादि के बारे में जागरूकता प्रदान की जाएगी। ग्राहकों को उनके चुकाने की क्षमता के आधार पर ऋण लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। निरोधक परामर्श मीडिया, कार्यशालाओं एवं सेमिनारों के जरिए दिया जा सकता है। उपचारात्मक परामर्श की स्थिति में, ग्राहक व्यक्तिगत ऋण प्रबन्धन योजनाओं पर चर्चा करने के लिए परामर्श केन्द्र से संपर्क कर सकते हैं ताकि ऐसे ऋणों के बारे में कोई समाधान निकल सके जिन्हें चुका पाने में वे अक्षम हैं। यहां, केन्द्र द्वारा ऋण के रीस्ट्रक्चरिंग की प्रभावी योजनाएं बनाई जा सकती हैं जिसके अंतर्गत अनौपचारिक स्रोतों को ऋण चुकाना शामिल हो सकता है और यदि आवश्यक हुआ तो बैंक की शाखा से संपर्क किया जा सकता है।
हालांकि FLCCs केन्द्रों द्वारा वित्तीय साक्षरता एवं साख परामर्श उपलब्ध कराए जाएंगे, कुशलता विकास/क्षमता निर्माण की दिशा में ग्रामीण विकास एवं स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RUDSETI) के क्रियाकलापों का तालमेल FLCCs के प्रयासों के साथ बनाया जा सकता है ताकि आपदाग्रस्त कर्जदार परिवारों की आमदनी/ ऋण चुकाने की क्षमता को बढ़ाया जा सके।



कवरेज

यद्यपि साख परामर्श सेवाएं बैंकों द्वारा ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में प्रदान की जा सकती हैं, इस तथ्य पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि भारतीय जनसंख्या का विशाल भाग ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करता है जिनकी साक्षरता का स्तर शहरी जनसंख्या की साक्षरता स्तर से निम्न है। ग्रामीण जनसंख्या अपनी वित्तीय जरूरतों के लिए अनौपचारिक क्षेत्रों पर अधिक निर्भर है। यह आवश्यक है कि सभी प्रकार के कर्जदारों के लिए परामर्श के विस्तृत आधार वाले सामान्यीकृत अभिगम के बजाए आंशिक अभिगम को अपनाया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित केन्द्र कृषक समुदायों तथा कृषि से संबंधित व्यवसायों से जुड़े लोगों की वित्तीय साक्षरता एवं परामर्श पर केन्द्रित हो सकते हैं। महानगरों/शहरी क्षेत्रों में स्थापित केन्द्र ऐसे लोगों पर अपना ध्यान केन्द्रित कर सकते हैं जिनपर क्रेडिट कार्ड, व्यक्तिगत ऋण, गृह ऋण इत्यादि बकाया हों। अपने नेटवर्क और पहुंच के अनुसार राजकीय क्षेत्र के बैंक ग्रामीण क्षेत्रों पर अपना ध्यान केन्द्रित कर सकते हैं जबकि निजी एवं विदेशी बैंक अपने परामर्श केन्द्र शहरी क्षेत्रों में स्थापित कर सकते हैं।



संगठन / प्रशासनिक ढांचा
  1. आरंभ में FLCCs के संचालन के लिए, बैंकों द्वारा एकल रूप से अथवा अन्य बैंकों के साथ संयुक्त रूप से ट्रस्टों अथवा सोसाइटियों की स्थापना की जा सकती है। बैंक ऐसे ट्रस्ट अथवा सोसाइटी के बोर्ड में स्थानीय सम्मानित नागरिकों को शामिल कर सकता है। यद्यपि, कार्यरत बैंककर्मी बोर्ड में शामिल नहीं किए जा सकते। आरंभ मेंFLCCs को धन की आपूर्ति पूर्ण रूप से बैंक/बैंकों द्वारा की जा सकती है। अधिकाधिक विस्तार हेतु FLCCs की स्थापना सभी स्तरों अर्थात प्रखंड, जिला, शहर तथा महानगर स्तरों पर की जा सकती है। SLBCs निजी तथा सरकारी दोनों क्षेत्रों के बैंकों से विचार-विमर्श एवं समन्वय कर सकते हैं, तथा चरणबद्ध रूप से विभिन्न स्तरों परFLCCs की स्थापना के लिए योजना बना सकते हैं। यद्यपि, आरंभ में लीड बैंकों द्वारा जिला मुख्यालयों मेंFLCCs की स्थापना के लिए कदम उठाए जा सकते हैं लेकिन प्रयास यह होना चाहिए कि लागत को यथासंभव कम से कम रखा जाए। ग्रामीण तथा ऐसे शहरी क्षेत्रों में जहां निम्न आय वाले कर्जदारों की संख्या अधिक है, नाबार्ड में वित्तीय समावेशन फंड (Financial Inclusion Fund) के जरिए लागत की भागीदारी के बारे में विचार किया जा सकता है। व्यवस्था के स्थापित हो जाने पर परामर्श केन्द्र लागत का एक हिस्सा उन बैंकों पर मामूली अधिभार लगाकर प्राप्त कर सकते हैं जिनके ग्राहक परामर्श केन्द्रों द्वारा बनाई गई साख परामर्श एवं ऋण प्रन्धन की योजना के परिणामस्वरूप उन्हें ऋण की अदायगी आरंभ कर देते हैं। दीर्घ काल में इससे FLCCs के लिए अपने बल-बूते पर परिचालित होना संभव हो सकता है। परामर्श केन्द्रों को बैंक के साथ नजदीकी संबंध बनाए रखना चाहिए और यथासंभव इन्हें बैंक परिसरों में स्थित नहीं होना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में यदि लागत कम करने की दृष्टि से बैंक शाखा के परिसर का उपयोग किया जाता है तो इसे पूरी तरह अलग होना चाहिए। इसके पीछे यह धारणा है कि इन केन्द्रों को संबद्ध बैंकों के वसूली अथवा विपणन एजेंटों के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए और बैंक के ग्राहक वर्ग, यहां तक कि दूसरे बैंकों के ग्राहक वर्ग भी स्वयं अपनी इच्छा से इन केन्द्रों से संपर्क करने में सुविधा अनुभव कर सके।
  2. परामर्श एवं ऋण प्रबन्धन सेवाएं ग्राहकों को नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि उनपर कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े।


आधारभूत संरचना
बैंकों द्वारा पर्याप्त संचार एवं नेटवर्किंग सुविधाओं के साथ उपयुक्त आधारभूत संरचना की स्थापना की जाएगी। ग्राहकों के लिए अलग से क्यूबिकलों का निर्माण किया जाएगा ताकि उनकी निजता सुरक्षित रहे तथा विचार-विमर्श के दौरान कर्जदारों को आत्मविश्वास का अनुभव हो।


साख परामर्श के प्रकार
ऑस्ट्रेलिया में, विक्टोरियन कन्ज्यूमर क्रेडिट रिव्यू रिपोर्ट 2006 में यह अनुशंसा की गई कि वित्तीय परामर्श सेवाओं के अंतर्गत समय पूर्व हस्तक्षेप (निरोधक) परामर्श तथा वित्तीय संकट से जूझ रहे ग्राहकों के लिए परामर्श शामिल होना चाहिए। अमेरिका में, बैंकरप्ट एब्यूज प्रिवेंशन एंड कन्ज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2005 ने साख परामर्श को ऐसे ग्राहकों के लिए आवश्यक कर दिया जो दिवालिया घोषित होने के लिए आवेदन करते हैं। बैंकों द्वारा ट्रिगर प्वाइंट्स विकसित किए जा सकते हैं ताकि वसूली के लिए कदम उठाने से पूर्व कर्जदारों को परामर्श केन्द्रों के द्वारा चेतावनी के संकेत दिए जा सकें। समय पर हस्तक्षेप से कर्जदार को आगे किसी वित्तीय उलझनों में उलझने से रोका जा सकेगा।


साख परामर्श तथा ऋण निपटारे की प्रणाली
  1. बैंकों को मुसीबत में पड़े अपने ग्राहकों को या किसी भी बैंक के ग्राहकों को उनके द्वारा स्थापित FLCC में संपर्क करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। ऐसे FLCC से जुड़ी जानकारियां लीड बैंक स्कीम के तहत उपलब्ध विभिन्न मंचों के जरिए प्रदान की जा सकती हैं।
  2. FLCC समूह परामर्श के लिए ओपन-हाउस सेमिनार का आयोजन कर सकता है, जो या तो केंद्र पर या जिले के विभिन्न स्थानों पर आयोजित किया जा सकता है। जिले में कार्य करने वाले बैंक ऐसे सेमिनारों को पूरी तरह से या आंशिक रूप से प्रायोजित कर सकते हैं।
  3. सिंगल क्रेडिटर-डेट के लिए FLCC उधारकर्ता को संबंधित बैंक से साथ मोल-तोल करने में मदद कर सकता है। व्यक्तियों द्वारा उपलब्ध मल्टिपल क्रेडिट की स्थिति में FLCC वैसे बैंक/बैंकों के साथ मोल-तोल कर सकता है, जो उधार राशि को पुनर्गठित करने के लिए व्यापक फैलाव वाले हों, तथा रीकवरी को प्रो रेटा आधार पर शेयर किया जाए। हालांकि FLCC स्वयं को धन की रिकवरी तथा वितरण में शामिल नहीं करेगा। यह कार्य संबंधित बैंक का होगा या उस बैंक का जो सभी बैंकों की तरफ से नियुक्त किया गया हो।


आधिकारिक मान्यता

ऑस्ट्रेलिया में व्यवहार में लाए जा रहे साख परामर्शदाताओं को आधिकारिक मान्यता लेने की जरूरत होती है। न्यू साउथ वेल्स का फाइनैंशियल काउंसलिंग असोसिएशन आधिकारिक प्रमाणीकरण का कार्य देखता है। इससे उनकी सेवाओं की गुणवत्ता तथा विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। प्रमाणीकरण के लिए साख परामर्शदाताओं को तय गुणवत्ता के स्तर की योग्यता रखनी होती है, ताकि उपभोक्ताओं को अधिकतम लाभ मिल सके। मौजूदा संगठन जैसे IBPS या निर्मित वित्तीय परामर्शदाताओं के संगठणन के जरिए बैंक उपयुक्त प्रमाणीकरण प्रक्रिया पर विचार कर सकते हैं।



शिक्षा तथा प्रशिक्षण- परामर्शदाता

चूंकि परामर्श केंद्र परेशान उधारकर्ता को मदद करने तथा मार्गदर्शन देने में अहम और जिम्मेदार भूमिका निभाता है, अतः यह आवश्यक है कि केवल सुशिक्षित/सुप्रशिक्षित परामर्शदाताओं का ही चयन इन केंद्रों पर फुल टाइम कर्मचारी के रूप में किया जाए। वर्ष 2008-09 के अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री ने यह संकेत दिया कि ऐसे व्यक्ति जो रिटायर्ड बैंक स्टाफ अधिकारी, या पूर्व सेवाकर्मी इत्यादि हैं, भी प्रमाणित परामर्शदाता के रूप में नियुक्त किए जाएंगे। साख परामर्शदाता को बैंकिंग, कानून, वित्त के अनुभव होने चाहिए तथा वे बातचीत के बेहतरीन हुनर तथा टीम बनाने की क्षमता वाले होने चाहिए। वर्तमान में व्यक्तिगत परामर्शदाता के लिए क्षमता तथा ज्ञान को अपडेट करना काफी अहम हो गया है। ज्वाइन करने के समय बैंकों द्वारा कुछ प्रशिक्षण दिया जाता है, पर यह वित्तीय प्रबंधन पर समग्र कोर्स न होकर केवल दी जाने वाली सेवाओं पर ही केंद्रित होता है। परामर्शदाताओं को बैंकिंग उद्योग की हालिया प्रगति के बारे में जानकारियां अद्यतन करनी जरूरी होती हैं। निरंतर रूप से अपने ज्ञान में इज़ाफा करने के लिए भी परामर्शदाताओं को अपडेट करने की जरूरत होती है। प्रशिक्षित परामर्शदाता की नियमित आपूर्ति के लिए IIBF द्वारा साख परामर्श और ऋण प्रबंधन पर विशेष कोर्स का आयोजन किया जाना तथा व्यावसायिक संस्थानों द्वारा बैंकिंग तथा वित्त से जुड़े कोर्सों को पेश किया जाना भी उपयोगी होगा।



इंटरफेस के प्रकार

परामर्श केंद्रों को व्यक्तिगत रूप से की गई मांग से निपटने के लिए फोन, ई-मेल तथा पोस्ट सुविधा से लैस होना चाहिए। उनके पास एक टोल फ्री नम्बर,ई-मेल तथा फैक्स नम्बर होना चाहिए ताकि उनसे आसानी से संपर्क किया जा सके। परामर्श केंद्र के विस्तार के लिए ब्लॉकों तथा जिलों में मोबाइल यूनिटों की भी व्यवस्था की जा सकती है।



आरबीआइ के दिशा-निर्देश
वर्तमान में साख परामर्शदाता अपने क्लाइंट को केवल परामर्श सेवा ही प्रदान करते हैं और ये अपने क्लाइंट की तरफ से बैंकों के साथ समझौता करने का कार्य नहीं करते। साख परामर्श को और बढ़ाने के लिए आरबीआइ बैंकों द्वारा समूह तथा व्यक्तिगत परामर्श के लिए FLCCs की स्थापना हेतु दिशा-निर्देश जारी कर सकता है, लोगों को ऐसे केंद्रों से सीधा संपर्क करने के लिए बढ़ावा देने के अलावा बैंक उन्हें मामले भी सौंप सकते हैं। आरबीआइ बैंकों द्वारा स्थापित FLCC से जुडी जानकारियों के फैलाव के लिए भी एक प्रणाली का विकास कर सकता है।


निगरानी

प्रत्येक राज्य में FLCC के संचालन की आरबीआइ के क्षेत्रीय निदेशक द्वारा गठित समिति द्वारा निगरानी की जा सकती है, तथा बैंकों को नियमित रूप से सुझाव दिया जा सकता है।



पारदर्शिता/ सूचनाओं का प्रकटीकरण

ग्राहकों को सूचित निर्णय लेने में मदद करने के लिए सभी बैंको को अपने वेबसाइटों पर शुल्कों, ब्याज दर, उत्पादन तथा उनके उत्पाद की अन्य विशेषताओं के विवरण देने चाहिए। सभी बैंकों की सूचनाओं को आरबीआइ अपनी वेबसाइट पर भी डाल सकता है तथा इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनैंस(IIBF)/IBA के सहयोग से सामान्य शब्दावलियों का एक शब्दकोश तैयार कर सकता है, ताकि ग्राहक आसानी से उनके अर्थ समझ सकें।



सूचनाओं का साझाकरण

वर्तमान में व्यक्तिगत वित्त उपलब्ध करना अपेक्षाकृत आसान हो गया है, खास कर ग्राहकों को कई सारे क्रेडिट कार्डों की उपलब्धता ने तो इसे और भी आसान बना दिया है, भले ही कुछ बैंकों की नजर में वे ऋण लेने के लिए उपयुक्त न हों। यह ध्यान देने योग्य है कि क्रेडिट सूचना देने वाली कंपनियों की स्थापना हो रही है और वे बैंकों को सकारात्मक तथा नकारात्मक दोनों तरह की सूचनाएं प्रदान कर रही हैं। आगे चलकरFLCC संबद्ध बैंकों या व्यापक डिफॉल्टर ऋणकर्ताओं वाले बैंकों से विस्तृत क्रेडिट जानकारियां प्राप्त कर सकता है।



प्रचार
  1. सभी संस्थानों द्वारा लोगों को विभिन्न योजनाओं/सुविधाओं के बारे में जागरुक बनाने पर जोर देने की आवश्यकता है। प्रचार के सभी रूपों, जैसे प्रेस कॉन्फ्रेंस, वर्कशॉप, प्रकाशन, वेबसाइट, रोड शो, मोबाइल यूनिट, ग्राम मेला इत्यादि की संभावना को सक्रिय रूप से तलाशना चाहिए। इस उद्देश्य के लिए सभी बैंकों द्वारा एक उपयुक्त बजट प्रदान किया जाना चाहिए। योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ने के लिए वित्तीय साक्षरता तथा परामर्श पर एक स्थायी समिति का गठन रिजर्व बैंक द्वारा किया जाना चाहिए, जिसमें रिजर्व बैंक के सदस्य, नाबार्ड, आइबीए, बीसीएसबीआइ, सीआइबीआइएल, तथा उस क्षेत्र में कार्य करने वाले एनजीओ तथा अन्य उपभोक्ता संगठन शामिल हों। इससे क्षेत्रों में उपभोक्ता शिक्षा तथा उपभोक्ता की सुरक्षा के लिए सम्मिलित सहयोग मिल पाएगा।
  2. परामर्श केंद्रों की सूची को आइबीए, बीसीएसबीआए, आरबीआई इत्यादि की वेबसाइटों पर दिया जाना चाहिए तथा उन्हें नियमित रूप से अपडेट करना चाहिए।
  3. वित्तीय साक्षरता तथा साख परामर्श को सफल बनाने के लिए यह आवश्यक है कि इनकी संकल्पनाओं के प्रति जागरुकता फैलाई जाए तथा बैंकों के लिए उससे भी अहम यह होगा कि ऐसे प्रयासों के समग्र लाभों को प्रोत्साहित किया जाए। यह जरूरी होगा कि इस प्रयास में बैकों के उच्च प्रबंधन पूर्ण रूप से शामिल रहें। इसलिए रिजर्व बैंक इस क्षेत्र में कार्यरत विशेषज्ञों तथा प्रमुख एनजीओ के अलावा प्रमुख व्यावसायिक बैंकों, आइबीए, नाबार्ड तथा राष्ट्रीय स्तर के सहकारी बैंकों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ बैठकों का आयोजन कर सकता है, ताकि वित्तीय साक्षरता तथा साख परामर्श हेतु संकल्पना, संभावनाओं तथा कार्य प्रणालियों पर चर्चा की जा सके और उसके बाद इस विषय पर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किया जा सके। क्रेडिट परामर्श की पेशकश को आगे चलकर बैंकों के लिए सही लेंडिंग (उधार) कोड का हिस्सा बनाया जा सकता है।

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