- सभी संस्थानों द्वारा लोगों को विभिन्न योजनाओं/सुविधाओं के बारे में जागरुक बनाने पर जोर देने की आवश्यकता है। प्रचार के सभी रूपों, जैसे प्रेस कॉन्फ्रेंस, वर्कशॉप, प्रकाशन, वेबसाइट, रोड शो, मोबाइल यूनिट, ग्राम मेला इत्यादि की संभावना को सक्रिय रूप से तलाशना चाहिए। इस उद्देश्य के लिए सभी बैंकों द्वारा एक उपयुक्त बजट प्रदान किया जाना चाहिए। योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ने के लिए वित्तीय साक्षरता तथा परामर्श पर एक स्थायी समिति का गठन रिजर्व बैंक द्वारा किया जाना चाहिए, जिसमें रिजर्व बैंक के सदस्य, नाबार्ड, आइबीए, बीसीएसबीआइ, सीआइबीआइएल, तथा उस क्षेत्र में कार्य करने वाले एनजीओ तथा अन्य उपभोक्ता संगठन शामिल हों। इससे क्षेत्रों में उपभोक्ता शिक्षा तथा उपभोक्ता की सुरक्षा के लिए सम्मिलित सहयोग मिल पाएगा।
- परामर्श केंद्रों की सूची को आइबीए, बीसीएसबीआए, आरबीआई इत्यादि की वेबसाइटों पर दिया जाना चाहिए तथा उन्हें नियमित रूप से अपडेट करना चाहिए।
- वित्तीय साक्षरता तथा साख परामर्श को सफल बनाने के लिए यह आवश्यक है कि इनकी संकल्पनाओं के प्रति जागरुकता फैलाई जाए तथा बैंकों के लिए उससे भी अहम यह होगा कि ऐसे प्रयासों के समग्र लाभों को प्रोत्साहित किया जाए। यह जरूरी होगा कि इस प्रयास में बैकों के उच्च प्रबंधन पूर्ण रूप से शामिल रहें। इसलिए रिजर्व बैंक इस क्षेत्र में कार्यरत विशेषज्ञों तथा प्रमुख एनजीओ के अलावा प्रमुख व्यावसायिक बैंकों, आइबीए, नाबार्ड तथा राष्ट्रीय स्तर के सहकारी बैंकों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ बैठकों का आयोजन कर सकता है, ताकि वित्तीय साक्षरता तथा साख परामर्श हेतु संकल्पना, संभावनाओं तथा कार्य प्रणालियों पर चर्चा की जा सके और उसके बाद इस विषय पर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किया जा सके। क्रेडिट परामर्श की पेशकश को आगे चलकर बैंकों के लिए सही लेंडिंग (उधार) कोड का हिस्सा बनाया जा सकता है।
|
|
No comments:
Post a Comment